मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों सूचकांकों में लगभग दो वर्षों की सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट देखने को मिली।
कारोबार के अंत में सेंसेक्स 2,496.89 अंक (3.26 प्रतिशत) गिरकर 74,207.24 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 775.65 अंक (3.26 प्रतिशत) टूटकर 23,002.15 पर आ गया।
बाजार में यह गिरावट उस समय आई जब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी अरब के यानबू पोर्ट पर तेल लोडिंग रोक दी गई है और कुछ प्रमुख रिफाइनरियों को नुकसान पहुंचा है।
इस घटनाक्रम के चलते ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 11 प्रतिशत बढ़कर 119.5 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जिससे बाजार में घबराहट बढ़ गई।
बाजार में अस्थिरता भी तेज रही। इंडिया VIX में 22 प्रतिशत से अधिक उछाल दर्ज किया गया, जो निवेशकों के बीच बढ़ती अनिश्चितता को दर्शाता है।
वृहद बाजार भी दबाव में रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक लगभग 3-3 प्रतिशत तक गिर गए। सेक्टरों में सबसे ज्यादा गिरावट ऑटो सेक्टर में देखी गई, जबकि वित्तीय सेवाएं और आईटी शेयरों में भी भारी बिकवाली हुई।
विशेषज्ञों के अनुसार, तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर ऑटो कंपनियों पर पड़ता है, वहीं वैश्विक अनिश्चितता के कारण वित्तीय और आईटी सेक्टर में भी दबाव बढ़ जाता है।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि जब तक मिडिल ईस्ट में तनाव बना रहेगा और तेल की कीमतें ऊंची रहेंगी, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है और निवेशकों का रुख सतर्क रहेगा।