नई दिल्ली : ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या और पश्चिम एशिया में तेजी से बिगड़ते हालात को लेकर कांग्रेस संसदीय दल की चेयरपर्सन सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। दोनों ने कहा है कि यह समय चुप्पी का नहीं, बल्कि स्पष्ट और नैतिक रुख अपनाने का है। सोनिया गांधी ने एक अंग्रेजी समाचार पत्र में लिखे आलेख के माध्यम से और राहुल गांधी ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मोदी सरकार की विदेश नीति पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। सोनिया गांधी ने लिखा है कि पहली मार्च को ईरान ने पुष्टि की कि उसके सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की अमरीका और इजरायल द्वारा किए गए लक्षित हमलों में हत्या कर दी गई। किसी संप्रभु राष्ट्र के वर्तमान प्रमुख की, वह भी चल रही कूटनीतिक वार्ताओं के बीच, इस प्रकार हत्या अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए गंभीर झटका है। सोनिया गांधी ने इसे अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का खतरनाक क्षरण बताया है। भारत की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि भारत सरकार ने न, तो इस हत्या की स्पष्ट शब्दों में निंदा की और न ही ईरान की संप्रभुता के उल्लंघन पर ठोस प्रतिक्रिया दी। सोनिया गांधी के अनुसार, जब किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष की लक्षित हत्या पर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की ओर से स्पष्ट और सिद्धांत आधारित प्रतिक्रिया नहीं आती, तो यह हमारी विदेश नीति की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगाता है।
उन्होंने लिखा है कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) के तहत किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता और राजनीतिक स्वतंत्रता के विरुद्ध बल प्रयोग वर्जित है। ऐसे में बिना युद्ध की घोषणा और कूटनीतिक प्रक्रिया के दौरान की गई यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून की भावना के विपरीत मानी जा रही है। वहीं राहुल गांधी ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमरीका, इजऱायल और ईरान के बीच बढ़ती शत्रुता एक पहले से ही नाजुक क्षेत्र को व्यापक संघर्ष की ओर धकेल रही है। उन्होंने कहा कि करोड़ों लोग, जिनमें लगभग एक करोड़ भारतीय भी शामिल हैं, अनिश्चितता और असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। राहुल गांधी ने स्पष्ट कहा कि सुरक्षा चिंताएं वास्तविक हो सकती हैं, लेकिन संप्रभुता का उल्लंघन करने वाले हमले संकट को और गहरा करते हैं। उन्होंने अमरीका-इजरायल के ईरान पर हमलों और ईरान द्वारा अन्य मध्य-पूर्वी देशों पर किए गए हमलों की निंदा की। उनका कहना था कि हिंसा से हिंसा ही जन्म लेती है। संवाद और संयम ही शांति का एकमात्र रास्ता हंै। उन्होंने प्रधानमंत्री से सीधे सवाल किया कि क्या वह एक राष्ट्राध्यक्ष की हत्या को विश्व व्यवस्था तय करने का तरीका मानते हैं? इस समय की चुप्पी भारत की वैश्विक साख को कमजोर करती है। कांग्रेस नेताओं ने कहा है कि लगभग एक करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में रहते और काम करते हैं। ऐसे में पश्चिम एशिया में बढ़ती अस्थिरता भारत के लिए केवल कूटनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि मानवीय और रणनीतिक चिंता का विषय भी है।