हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि किसी भी देश और प्रदेश की ताकत उसकी बड़ी-बड़ी इमारतों और भवनों से नहीं, बल्कि उसके युवाओं के ज्ञान, शोध और नवाचार से होती है। उन्होंने शोधकर्ताओं का आह्वान किया कि वे प्रदेश के विकास और समाजहित से जुड़े विषयों पर गहन शोध करें तथा नवीनतम तकनीक का उपयोग करते हुए अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा दें। मुख्यमंत्री आज पंचकूला के सेक्टर-3 स्थित स्वर्ण जयंती हरियाणा वित्तीय प्रबंधन संस्थान में उच्चतर शिक्षण संस्थानों के शोधकर्ताओं के साथ आयोजित संवाद कार्यक्रम में मुख्यातिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा भी उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026-27 के बजट में ‘हरियाणा विजन-2047’ को धरातल पर उतारने के लिए 20 करोड़ रुपये की लागत से ‘हरियाणा राज्य अनुसंधान निधि’ के लिए 20 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया है। इसके तहत 90 अनुसंधान परियोजनाओं के लिए महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों एवं निजी विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी-अपनी परियोजनाओं पर चर्चा की। हरियाणा राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद द्वारा इन शोधकर्ताओं को 11.25 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शोध का विषय केवल शोध पत्र प्रकाशित करने और किताबें लिखने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका उद्देश्य समाज और लोगों के जीवन को सरल बनाना होना चाहिए। ज्ञान और शोध में इतनी शक्ति है कि इनके माध्यम से समाज की ज्वलंत समस्याओं का समाधान कर लोगों को लाभ पहुंचाया जा सकता है। आज जल प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन और कृषि उत्पादन जैसी गंभीर समस्याएं हमारे सामने चुनौती बनी हुई हैं। शोधकर्ता इन विषयों पर अनुसंधान कर इनके समाधान में महत्वपूर्ण सहयोग कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि पानी एक प्राकृतिक संसाधन है और इसका निर्माण नहीं किया जा सकता। पानी बचेगा, तभी कल जीवन बचेगा। इसलिए इस विषय पर हमें अधिक से अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। बढ़ते औद्योगीकरण और शहरीकरण के कारण पानी की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। उद्योगों को भी पानी की जरूरत है, जबकि भूजल स्तर लगातार गिर रहा है और उसकी गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। शोध के माध्यम से यह पता लगाया जाना चाहिए कि भूजल स्तर को कैसे सुधारा जाए और पानी की गुणवत्ता को किस प्रकार बेहतर बनाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यक्ति के लिए कोई भी समस्या बड़ी नहीं होती, हर समस्या का समाधान संभव है। शोधकर्ता अपने ज्ञान और प्रतिभा के माध्यम से लोगों के जीवन को सरल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। हमारा लक्ष्य हरियाणा को अनुसंधान, नवाचार, नई सोच और ज्ञान आधारित विकास का अग्रणी केंद्र बनाना है। ऐसा हरियाणा, जो उद्यमिता और तकनीक के बल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप ‘विकसित भारत-2047’ के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाए।
उन्होंने कहा कि आज शक्ति की परिभाषा बदल रही है। भविष्य में वही देश और प्रदेश सबसे अधिक शक्तिशाली होंगे, जिनके पास नया ज्ञान और नई तकनीक होगी।
मुख्यमंत्री ने शोधकर्ताओं को भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की कविता की पंक्तिया “हार नहीं मानूंगा, रार नई ठानूंगा, काल के कपाल पर लिखता-मिटाता हूं, गीत नया गाता हूं” को अपना लक्ष्य मानकर शोध को सार्थक परिणाम मिलने तक निरंतर प्रयास करते रहने का आह्वान किया।
उन्होंने शोधकर्ताओं से कहा कि आपका शोध हरियाणा की धरती और यहां के लोगों की वास्तविक जरूरतों से जुड़ा होना चाहिए। कृषि में कम पानी से अधिक उत्पादन कैसे हो, मिट्टी का स्वास्थ्य कैसे सुधरे, फसल अवशेषों का उपयोग किस प्रकार हो, जल प्रबंधन और भूजल संरक्षण के प्रभावी मॉडल कैसे विकसित किए जाएं, जलवायु परिवर्तन का खेती और जनजीवन पर पड़ने वाले प्रभाव का समाधान क्या हो, ऐसे प्रश्न हमारे गांवों, किसानों और आने वाली पीढ़ियों से सीधे जुड़े हैं। शोधकर्ताओं को इन विषयों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बायोटेक्नोलॉजी, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल प्रौद्योगिकी और न्यू मैटेरियल्स जैसी उभरती तकनीकें शिक्षा, रोजगार और अर्थव्यवस्था का स्वरूप बदल रही हैं। हमें भी अपनी शिक्षा और अनुसंधान व्यवस्था को इन बदलावों के अनुरूप आगे बढ़ाना होगा। साथ ही, शिक्षा और रोजगार के बीच की दूरी समाप्त करना भी हमारी प्राथमिकता है।