पानीपत : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर हरियाणा के हथकरघा क्षेत्र में पिछले करीब 60 वर्षों से काम कर रहे पद्मश्री सम्मान प्राप्त खेमराज सुंदरियाल ने उनको शुभकामनाएं दी हैं। खेमराज ने कहा कि लंबे समय तक देश के अनेक कारीगरों और बुनकरों के हुनर को व्यापक पहचान नहीं मिल पाई। उन्होंने कहा कि वर्ष 1975 के दौर में हथकरघा उद्योग पिछड़ रहा था। इसके बाद भारत सरकार ने यहां सेंटर स्थापित किया और उन्होंने बुनकरों व उद्योग से जुड़े लोगों को प्रशिक्षण देकर हथकरघा क्षेत्र को आगे बढ़ाने का प्रयास किया। अपने कार्य और योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा पद्मश्री के लिए नामित किए जाने पर खेमराज सुंदरियाल ने इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया। उनका कहना है कि मोदी सरकार ने हथकरघा और बुनकरों को नई पहचान दिलाने का काम किया है। जिन कारीगरों को पहले सीमित स्तर पर ही जाना जाता था, उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने लगी है।
खेमराज सुंदरियाल के बेटे अजय ने कहा कि उनके पिता पिछले 60 वर्षों से हथकरघा क्षेत्र में काम कर रहे थे, लेकिन उनके हुनर की पहचान बड़े स्तर पर नहीं हो पाई थी। जब केंद्र सरकार की ओर से स्वयं फोन कर पद्मश्री के लिए उनके पिता के चयन की जानकारी दी गई तो परिवार के लिए यह खुशी और गर्व का क्षण था।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार का आभार जताते हुए प्रधानमंत्री को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। इन कहानियों में एक तरफ स्वनिधि योजना के जरिए छोटे कारोबारियों के आत्मनिर्भर बनने की तस्वीर दिखाई देती है, तो दूसरी तरफ दशकों तक हुनर को साधने वाले कारीगरों को राष्ट्रीय सम्मान मिलने से यह संदेश भी सामने आता है कि मेहनत, हुनर और स्वरोजगार को पहचान मिलने से आम परिवारों की जिंदगी में बड़ा बदलाव आ सकता है।