नई दिल्ली(एजेंसी) : रजोनिवृत्ति महिलाओं के जीवन का एक स्वाभाविक पड़ाव है, लेकिन इस दौरान होने वाले शारीरिक और मानसिक बदलावों को लेकर आज भी जागरूकता की कमी दिखाई देती है। खासतौर पर मध्य जीवन में लंबे समय तक रहने वाला दर्द महिलाओं के स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण पहलू बनकर सामने आता है। इसी मुद्दे को समझने और इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से 18 अक्टूबर को विश्व रजोनिवृत्ति दिवस (World Menopause Day) मनाया जाता है। वर्ष 2026 में इस दिवस की थीम “मध्य जीवन में दीर्घकालिक दर्द” (Chronic Pain at Midlife) रखी गई है। इंटरनेशनल मेनोपॉज सोसाइटी के अनुसार, रजोनिवृत्ति के आसपास और इसके बाद लंबे समय तक रहने वाले दर्द को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि इसका महिलाओं के स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता पर व्यापक असर पड़ सकता है।
रजोनिवृत्ति जीवन का स्वाभाविक पड़ाव
रजोनिवृत्ति किसी बीमारी का नाम नहीं है, बल्कि महिला के जीवन में आने वाला एक स्वाभाविक जैविक बदलाव है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, आमतौर पर रजोनिवृत्ति 45 से 55 वर्ष की उम्र के बीच होती है। यह वह अवस्था है जब मासिक धर्म स्थायी रूप से बंद हो जाता है और शरीर में प्रजनन हार्मोन के स्तर में बदलाव आता है। यह परिवर्तन अचानक नहीं होता, बल्कि इससे पहले एक संक्रमणकाल आता है, जिसे पेरिमेनोपॉज कहा जाता है।
पेरिमेनोपॉज से शुरू होता है बदलाव
रजोनिवृत्ति से पहले कई महिलाओं के मासिक धर्म चक्र में बदलाव दिखाई देने लगते हैं। कभी पीरियड समय से पहले आ सकता है तो कभी उसके बीच का अंतर बढ़ सकता है। रक्तस्राव की मात्रा में भी बदलाव हो सकता है। इसी अवधि में शरीर हार्मोनल बदलावों के अनुकूल होने लगता है। कुछ महिलाओं में यह संक्रमण अपेक्षाकृत सहज होता है, जबकि कुछ में लक्षण अधिक तीव्र हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, पेरिमेनोपॉज को समझना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस चरण में दिखाई देने वाले बदलावों को केवल उम्र बढ़ने का सामान्य हिस्सा मानकर नजरअंदाज करना उचित नहीं है।
हॉट फ्लैश और रात में पसीना आम लक्षण
रजोनिवृत्ति के दौरान शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव कई तरह के लक्षण पैदा कर सकते हैं। अचानक शरीर में गर्मी महसूस होना, चेहरे और गर्दन पर गर्माहट बढ़ना तथा रात में अधिक पसीना आना प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं। कुछ महिलाओं में ये लक्षण हल्के होते हैं, जबकि कुछ के लिए ये रोजमर्रा की गतिविधियों और नींद को प्रभावित कर सकते हैं। बार-बार नींद टूटने से दिनभर थकान, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी जैसी समस्याएं भी महसूस हो सकती हैं।
नींद और मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर
मेनोपॉज के दौरान केवल शारीरिक बदलाव ही नहीं होते, बल्कि मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी प्रभाव पड़ सकता है। नींद में परेशानी, बेचैनी, मूड में बदलाव, चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई जैसी समस्याएं कुछ महिलाओं में दिखाई दे सकती हैं। कई बार महिलाएं इन लक्षणों को सामान्य तनाव या घरेलू और कामकाजी जिम्मेदारियों से जोड़ देती हैं। ऐसे में परिवार और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की संवेदनशील भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
दर्द को नजरअंदाज न करने का संदेश
वर्ष 2026 की थीम का खास जोर मध्य जीवन में होने वाले दीर्घकालिक दर्द को पहचानने पर है। इंटरनेशनल मेनोपॉज सोसाइटी के अनुसार, मेनोपॉज संक्रमण के दौरान और उसके बाद कई महिलाएं दर्द का अनुभव कर सकती हैं, लेकिन इसे अक्सर कम करके आंका जाता है। महिलाओं के दर्द को कभी-कभी भावनात्मक कारणों से जोड़कर देखा जाता है, जिससे उचित जांच और उपचार में देरी हो सकती है। इस वर्ष की मुहिम दर्द को मेनोपॉज देखभाल का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हुए इसकी बेहतर पहचान, शोध और व्यक्तिगत उपचार की जरूरत पर जोर देती है।
जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द की शिकायत
मध्य जीवन के दौरान कुछ महिलाओं को जोड़ों, मांसपेशियों और शरीर के अलग-अलग हिस्सों में दर्द या जकड़न महसूस हो सकती है। हालांकि, हर मामले में दर्द का कारण मेनोपॉज ही हो, यह जरूरी नहीं है। उम्र, शारीरिक गतिविधि, वजन, नींद, अन्य स्वास्थ्य स्थितियां और कई दूसरे कारण भी दर्द के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। इसलिए लगातार या बढ़ते दर्द को खुद से मेनोपॉज का लक्षण मानने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। सही कारण की पहचान होने पर उपचार और जीवनशैली में बदलाव की दिशा तय की जा सकती है।
हड्डियों की सेहत पर विशेष ध्यान जरूरी
मेनोपॉज के बाद महिलाओं में हड्डियों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। हार्मोनल बदलाव हड्डियों के घनत्व को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे आगे चलकर हड्डियों के कमजोर होने का जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे में पर्याप्त पोषण, नियमित शारीरिक गतिविधि और चिकित्सकीय सलाह महत्वपूर्ण हो जाती है। किन महिलाओं को बोन डेंसिटी की जांच की जरूरत है, यह उम्र और व्यक्तिगत जोखिम के आधार पर डॉक्टर तय कर सकते हैं।
दिल की सेहत को लेकर भी रहें सतर्क
मध्य जीवन महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण चरण है। रजोनिवृत्ति के आसपास शरीर में होने वाले बदलावों के साथ हृदय और चयापचय से जुड़े जोखिमों पर भी ध्यान देना जरूरी है। रक्तचाप, रक्त शर्करा, कोलेस्ट्रॉल, वजन और शारीरिक सक्रियता जैसे पहलुओं की नियमित निगरानी समग्र स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है। इंटरनेशनल मेनोपॉज सोसाइटी की 2026 की सिफारिशों में भी कार्डियोमेटाबोलिक स्वास्थ्य, हड्डियों के स्वास्थ्य और अन्य दीर्घकालिक स्वास्थ्य पहलुओं को मेनोपॉज देखभाल का हिस्सा माना गया है।
जीवनशैली में बदलाव की अहम भूमिका
स्वस्थ जीवनशैली मेनोपॉज के दौरान और उसके बाद बेहतर स्वास्थ्य बनाए रखने में मदद कर सकती है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव को नियंत्रित करने के प्रयास महत्वपूर्ण हैं। धूम्रपान और अत्यधिक शराब जैसे जोखिमकारी व्यवहार से बचना भी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। वर्ष 2025 में विश्व रजोनिवृत्ति दिवस की थीम भी लाइफस्टाइल मेडिसिन थी, जिसमें खान-पान, शारीरिक गतिविधि, मानसिक स्वास्थ्य और नींद जैसे पहलुओं पर जोर दिया गया था।
खान-पान में संतुलन जरूरी
मेनोपॉज के दौरान भोजन में पर्याप्त पोषक तत्वों को शामिल करना महत्वपूर्ण है। फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, प्रोटीन के अच्छे स्रोत और आवश्यक पोषक तत्वों से युक्त संतुलित आहार समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है। कैल्शियम और विटामिन डी जैसे पोषक तत्व हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन किसी भी सप्लीमेंट का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही किया जाना चाहिए।
व्यायाम से शरीर और मन दोनों को लाभ
नियमित शारीरिक गतिविधि मध्य जीवन में स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पैदल चलना, योग, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, स्ट्रेचिंग और व्यक्ति की क्षमता के अनुसार अन्य व्यायाम शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकते हैं। व्यायाम हड्डियों और मांसपेशियों की मजबूती, वजन प्रबंधन तथा हृदय स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी है। हालांकि, किसी विशेष बीमारी या लगातार दर्द की स्थिति में व्यायाम शुरू करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर होता है।
हार्मोन थेरेपी हर महिला के लिए समान नहीं
मेनोपॉज के लक्षणों के उपचार में मेनोपॉज हार्मोन थेरेपी यानी MHT कुछ महिलाओं के लिए उपयोगी हो सकती है, लेकिन यह सभी के लिए एक समान विकल्प नहीं है। इसके लाभ और संभावित जोखिम महिला की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, लक्षणों, चिकित्सा इतिहास और व्यक्तिगत जोखिमों के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए हार्मोन थेरेपी शुरू करने या बंद करने का निर्णय स्वयं लेने के बजाय योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से चर्चा करनी चाहिए। इंटरनेशनल मेनोपॉज सोसाइटी की मौजूदा सिफारिशें भी व्यक्तिगत और साक्ष्य-आधारित देखभाल पर जोर देती हैं।
असामान्य रक्तस्राव को सामान्य न मानें
मेनोपॉज से पहले मासिक धर्म में अनियमितता हो सकती है, लेकिन हर प्रकार का रक्तस्राव सामान्य नहीं माना जा सकता। विशेष रूप से लगातार अत्यधिक रक्तस्राव, असामान्य पैटर्न या मेनोपॉज के बाद दोबारा रक्तस्राव होने पर चिकित्सकीय जांच आवश्यक है। ऐसे लक्षणों को केवल हार्मोनल बदलाव मानकर लंबे समय तक टालना उचित नहीं है। समय पर जांच से किसी गंभीर कारण की पहचान और उपचार संभव हो सकता है।
समय से पहले मेनोपॉज पर भी जागरूकता जरूरी
हर महिला में रजोनिवृत्ति एक ही उम्र में नहीं होती। कुछ महिलाओं में यह सामान्य उम्र से काफी पहले शुरू हो सकती है। समय से पहले रजोनिवृत्ति या प्रीमेच्योर ओवेरियन इंसफिशिएंसी जैसी स्थितियों में विशेषज्ञ की सलाह विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसी स्थिति में समय पर जांच और उचित चिकित्सकीय मार्गदर्शन स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को समझने और उनके प्रबंधन में मदद कर सकता है।
परिवार का सहयोग भी जरूरी
मेनोपॉज केवल महिलाओं का निजी स्वास्थ्य विषय नहीं है। इस दौरान परिवार का सहयोग महिला के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। पति, बच्चे और परिवार के अन्य सदस्य यदि लक्षणों को समझें और उन्हें गंभीरता से लें तो महिला के लिए इस बदलाव को स्वीकार करना आसान हो सकता है। बातचीत और सहयोग से मेनोपॉज को लेकर बनी झिझक और गलत धारणाओं को कम किया जा सकता है।
कार्यस्थल पर भी संवेदनशीलता की जरूरत
कई महिलाएं मेनोपॉज के दौरान भी अपनी पेशेवर जिम्मेदारियां निभाती हैं। हॉट फ्लैश, नींद की कमी, थकान, दर्द या एकाग्रता में परेशानी जैसी समस्याएं कामकाजी जीवन को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में कार्यस्थलों पर स्वास्थ्य संबंधी संवेदनशीलता, पर्याप्त सुविधाएं और जरूरत पड़ने पर व्यावहारिक सहयोग महिलाओं के लिए मददगार हो सकता है। मेनोपॉज को कमजोरी के रूप में देखने के बजाय इसे महिलाओं के जीवन के सामान्य स्वास्थ्य संक्रमण के रूप में समझने की जरूरत है।
जागरूकता से टूटेगी चुप्पी
विश्व रजोनिवृत्ति दिवस का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि मेनोपॉज पर खुलकर बात की जाए। जानकारी के अभाव में महिलाएं कई बार वर्षों तक लक्षणों के साथ जीवन बिताती रहती हैं। इंटरनेशनल मेनोपॉज सोसाइटी वर्ष 2009 से इस दिवस के माध्यम से मेनोपॉज के प्रति जागरूकता बढ़ाने और महिलाओं के अनुभव को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रही है।
स्वस्थ मध्य जीवन की ओर बढ़ने का अवसर
मेनोपॉज जीवन का अंत नहीं, बल्कि जीवन के एक नए चरण की शुरुआत है। इस दौरान शरीर में होने वाले बदलावों को समझना, लक्षणों को पहचानना, नियमित स्वास्थ्य जांच कराना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेना महिला को स्वस्थ और सक्रिय जीवन की ओर आगे बढ़ने में मदद कर सकता है। वर्ष 2026 में विश्व रजोनिवृत्ति दिवस का संदेश विशेष रूप से यह है कि मध्य जीवन के दर्द को चुपचाप सहने के बजाय उसे पहचाना जाए, उसकी उचित जांच हो और महिला की जरूरत के अनुसार देखभाल उपलब्ध कराई जाए।