मॉस्को/नई दिल्ली : भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को कहा कि भारत अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान "मानवता-प्रथम" और "जन-केंद्रित" दृष्टिकोण के साथ रूस के साथ सहयोग को और गहरा करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि साझा चुनौतियों का संतुलित और समावेशी तरीके से समाधान किया जा सके। ‘इंडिया एंड रशिया: टुवर्ड्स अ न्यू बाइलेट्रल एजेंडा ’ (भारत और रूस: एक नए द्विपक्षीय एजेंडे की ओर) शीर्षक वाले सम्मेलन को वर्चुअली संबोधित करते हुए उन्होंने भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि भारत अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान रूस के साथ मिलकर साझा वैश्विक चुनौतियों पर काम करने को तैयार है और यह सहयोग संतुलन और समावेशन के सिद्धांतों पर आधारित होगा। विदेश मंत्री ने दिसंबर 2025 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा को याद करते हुए कहा कि इस दौरे ने द्विपक्षीय संबंधों को कई नए और विविध क्षेत्रों तक विस्तार दिया। उन्होंने बताया कि इस यात्रा के दौरान कुशल पेशेवरों की आवाजाही, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा, समुद्री सहयोग, उर्वरक, कस्टम और व्यापार, तथा शैक्षणिक और मीडिया सहयोग जैसे क्षेत्रों में नई पहल हुई।
जयशंकर ने यह भी रेखांकित किया कि दोनों देश मौजूदा 68.7 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक बढ़ाकर 100 अरब डॉलर तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसके लिए भारत और रूस के बीच यूरेशियन आर्थिक संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम रूप देने, गैर-टैरिफ बाधाओं और नियामकीय अड़चनों को दूर करने तथा भारतीय कुशल कार्यबल के बेहतर उपयोग पर जोर दिया गया।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं, जो कला, योग, आयुर्वेद और संस्कृति के प्रति साझा रुचि पर आधारित हैं। उन्होंने रूस के काल्मिकिया क्षेत्र में पिछले वर्ष भारत से भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी को दोनों देशों के गहरे सांस्कृतिक संबंधों का उदाहरण बताया।
जयशंकर ने यह भी विश्वास जताया कि रूस के येकातेरिनबर्ग और कजान में भारत के नए वाणिज्य दूतावास खुलने से आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों को और मजबूती मिलेगी।
उन्होंने बदलती वैश्विक व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि बहुध्रुवीय विश्व में सहयोग को और बढ़ाने की आवश्यकता है, खासकर ब्रिक्स, एससीओ, जी20 और संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों के माध्यम से।
इस दौरान उन्होंने सम्मेलन के आयोजन के लिए रशियन इंटरनेशनल अफेयर्स काउंसिल और मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास की सराहना की, साथ ही रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव को शुभकामनाएं भी दीं।
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और रूस के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी आपसी विश्वास और सम्मान पर आधारित है, जिसने दशकों से क्षेत्रीय और वैश्विक शांति, स्थिरता और प्रगति को आगे बढ़ाया है, और मौजूदा बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में यह सहयोग और भी मजबूत हो रहा है।