India-Pakistan: हाल के कुछ दिनों में भारत और चीन के संबंध में सुधार की संभावना दिखने लगी है। इसका सबसे अधिक असर पाकिस्तान पर देखने को मिल रहा है। यही वजह है कि शहबाज शरीफ की सरकार पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और गिलगित-बाल्टिस्तान के संवैधानिक ढांचे में बड़े बदलाव करने की योजना बना रही है। पाकिस्तान के सरकारी सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि पाकिस्तान इन दोनों क्षेत्रों को एक अंतरिम प्रांत जैसा दर्जा देने पर विचार कर रहा है। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 1 (खंड 2) में संशोधन या 28वें संवैधानिक संशोधन के जरिए नया कानून लाया जा सकता है।
पाकिस्तान की इस कवायद के पीछे भारत और चीन के बीच सुधरते संबंध और उनकी सीमा वार्ता को एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। पाकिस्तान लगातार भारत और चीन के बीच जारी बैठकों पर नजर बनाए हुए है। यदि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद का कोई स्थाई समाधान निकलता है तो इसका सीधा प्रभाव कश्मीर से जुड़े मौजूदा क्षेत्रीय और राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है।
चीन-भारत वार्ता से पाकिस्तान को कैसा डर
कश्मीर से जुड़े विवाद में भारत, पाकिस्तान और चीन तीनों शामिल हैं। जहां चीन के पास अक्साई चिन का क्षेत्र है, वहीं पाकिस्तान के कब्जे में पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान हैं। 1963 के सीमा समझौते के तहत पाकिस्तान ने शक्सगाम घाटी का इलाका चीन को सौंप दिया था, जिसे भारत हमेशा से अवैध और अमान्य मानता आया है।
वर्तमान में चीन एक तरफ भारत के साथ अपने आर्थिक और सीमा संबंध सामान्य करने की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी भी बनाए रखना चाहता है।
पाकिस्तान को आशंका है कि यदि भारत और चीन अपने सीमा मामलों पर किसी नतीजे पर पहुंचते हैं तो इससे पीओके में उसकी प्रशासनिक और रणनीतिक स्थिति पर असर पड़ेगा। इसी कारण वह अपनी कानूनी स्थिति को मजबूत करने के लिए यह कदम उठा रहा है।
अनुच्छेद 370 पर भारत के फैसले का असर
भारत सरकार ने अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाकर और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख में विभाजित कर बड़ा रणनीतिक बदलाव किया था। इसके वर्षों बाद अब पाकिस्तान भी अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों की स्थिति में फेरबदल की कानूनी संभावनाएं तलाश रहा है।
सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान की यह योजना सीधे तौर पर भारत के 2019 के फैसले की नकल नहीं है, बल्कि वह कश्मीर विवाद पर अपने पुराने रुख को कायम रखते हुए केवल अंतरिम दर्जा देने का विकल्प चुन सकता है।
फिलहाल संवैधानिक बदलाव की रूपरेखा पूरी तरह से तैयार नहीं हुई है। पाकिस्तान इस बात पर मंथन कर रहा है कि क्या इसके लिए 28वें संशोधन का इस्तेमाल किया जाए या किसी अलग विधेयक के जरिए यह बदलाव लागू किया जाए। अंतिम निर्णय भारत-चीन वार्ता के रुख को देखकर लिया जाएगा।