प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को दृढ़ संकल्प, निरंतर प्रयास और सकारात्मक सोच की शक्ति को रेखांकित करते हुए एक संस्कृत सुभाषित साझा किया। उन्होंने कहा कि यही गुण सफलता की वास्तविक कुंजी हैं और देश के युवा इन्हीं मूल्यों से प्रेरित होकर ‘विकसित भारत’ के निर्माण के लिए पूरे समर्पण के साथ कार्य कर रहे हैं।
संस्कृत सुभाषित किया साझा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए लिखा—”अनिर्वेदः श्रियो मूलमनिर्वेदः परं सुखम्। अनिर्वेदो हि सततं सर्वार्थेषु प्रवर्तकः॥”
समर्पण और सतत प्रयास ही प्रगति की कुंजी
इस सुभाषित का भावार्थ है कि प्रगति का मूल आधार उत्साह, दृढ़ विश्वास और निरंतर प्रयास है। जो व्यक्ति निराशा के आगे झुकने के बजाय अपने लक्ष्य की ओर लगातार प्रयास करता रहता है, वह अंततः सफलता प्राप्त करता है। अटूट विश्वास और समर्पण के साथ किया गया सतत प्रयास ही जीवन में प्रगति, सफलता और उत्कृष्टता का मार्ग प्रशस्त करता है।
युवा बना रहे विकसित भारत की नींव
पीएम मोदी ने कहा कि देश के युवा दृढ़ विश्वास, सतत प्रयास और सकारात्मक सोच के साथ विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में जुटे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि युवाओं का यही समर्पण देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।
पीएमओ ने एक्स पर साझा किया संदेश
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, “दृढ़ विश्वास, सतत प्रयास और सकारात्मक सोच सफलता की असली कुंजी है। हमारे युवा साथी इन्हीं गुणों के साथ पूरे समर्पण भाव से विकसित भारत के निर्माण में जुटे हैं।”