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बाज़ार

तेल कीमतों में उछाल और भू-राजनीतिक तनावों के बीच निवेशकों के लिए एफएमसीजी स्टॉक्स बने 'सेफ ऑप्शन': रिपोर्ट

14 अप्रैल, 2026 01:10 PM

मुंबई : तेल की बढ़ती कीमतों और बढ़ते वैश्विक तनाव के बीच एफएमसीजी (फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स) सेक्टर के शेयर निवेशकों के लिए 'सेफ ऑप्शन' यानी सुरक्षित विकल्प बनकर उभर रहे हैं। हालांकि, निकट अवधि में इस सेक्टर का आउटलुक थोड़ा कमजोर हुआ है।


बीएनपी पारिबास इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में हालिया तेजी आई है, जिससे एफएमसीजी कंपनियों का आउटलुक प्रभावित हुआ है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से कंपनियों के इनपुट कॉस्ट बढ़ेंगे और इससे मुनाफे (मार्जिन) पर दबाव पड़ सकता है।
हालांकि, ब्रोकरेज ने यह भी बताया कि इतिहास में एफएमसीजी सेक्टर ने तेल संकट के दौरान बेहतर प्रदर्शन किया है, जैसे 2008, 2011 और 2022 में। इन वर्षों में अन्य सेक्टरों के मुकाबले एफएमसीजी कंपनियों की कमाई में कम गिरावट आई थी।


रिपोर्ट के अनुसार, हाल के समय में एफएमसीजी शेयरों में ज्यादा गिरावट देखने को मिली है, जिससे अब ये काफी सस्ते वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहे हैं। कई कंपनियों के शेयर अब करीब एक दशक पुराने स्तरों पर पहुंच गए हैं, जो निवेशकों के लिए एक अच्छा मौका बन सकता है।
पहले इस सेक्टर को वित्त वर्ष 2027 में कमाई में सुधार के नजरिए से देखा जा रहा था, लेकिन अब इसे बढ़ती ऊर्जा कीमतों और वैश्विक अनिश्चितता के बीच एक सुरक्षित निवेश के रूप में देखा जा रहा है।
निकट अवधि में, वित्त वर्ष 2026 की मार्च तिमाही में घरेलू खपत में सुधार का फायदा दिख सकता है। विश्लेषकों का अनुमान है कि इस दौरान कंपनियों की ईबीआईटीडीए ग्रोथ दो अंकों में रह सकती है, जो पिछले करीब 10 तिमाहियों में पहली बार होगा।


हालांकि, वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही से कच्चे माल की लागत, खासकर पाम ऑयल और पॉलिमर जैसे तेल से जुड़े इनपुट महंगे होने के कारण मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियां इन बढ़ती लागतों को कुछ हद तक कीमतें बढ़ाकर ग्राहकों पर डाल सकती हैं।
मार्च तिमाही के अंत में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 24 प्रतिशत की तेजी आई, जिससे कच्चे माल की लागत और बढ़ गई।


हालांकि, सीजफायर के कारण तेल की कीमतों में तेज उछाल का खतरा कुछ कम हुआ है, लेकिन अगर कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो इससे मांग और मुनाफे पर असर पड़ सकता है।
विश्लेषकों ने वित्त वर्ष 2027 और वित्त वर्ष 2028 के लिए इस सेक्टर की कमाई के अनुमान को घटाया है, जो अब बाजार के औसत अनुमान से भी कम है। इसका कारण बढ़ती लागत और करेंसी से जुड़ा दबाव है।


इन चुनौतियों के बावजूद, एफएमसीजी सेक्टर को अन्य सेक्टरों की तुलना में ज्यादा मजबूत माना जा रहा है, खासकर तब जब बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ता है।
जब से यह वैश्विक तनाव शुरू हुआ है, तब से निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स में 27 फरवरी से 10 अप्रैल के बीच 5.76 प्रतिशत यानी 2,948 अंकों की गिरावट आई है और यह 48,194 पर आ गया।
इसके अलावा, यह इंडेक्स एनएसई पर 47,291 के इंट्राडे लो तक भी पहुंचा, जो करीब 2 प्रतिशत या 900 अंकों की गिरावट को दर्शाता है।

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