नई दिल्ली : कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर 'टैरिफ को हथियार की तरह इस्तेमाल' करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा है कि ट्रंप के इस कदम की निंदा की जानी चाहिए.
पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम ने एक्स पोस्ट में कहा कि उन्हें इस बात से हैरानी नहीं है कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के 2 अप्रैल, 2025 को घोषित तथाकथित रेसिप्रोकल टैरिफ (Reciprocal Tariff) को रद्द करने के बाद ट्रंप बेताब होकर टैरिफ को फिर से लगाने के तरीके तलाश कर रहे हैं.
उन्होंने पूछा, "हैरानी की बात यह है कि कुछ टिप्पणी करने वाले और बीजेपी की तरफ झुकाव रखने वाले ट्रोल (सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग करने वाले), किसी न किसी तरह से ट्रंप के टैरिफ बनाए रखने के फैसले को सही ठहरा रहे हैं. क्या उन्हें एहसास है कि टैरिफ ने व्यापार को बुरी तरह से रोक दिया और यह उस नियम-आधारित ट्रेडिंग ऑर्डर के खिलाफ था जो सभी देश चाहते हैं? क्या उन्हें एहसास है कि टैरिफ ने अमेरिका को भारत के एक्सपोर्ट को नुकसान पहुंचाया है?"
कांग्रेस नेता चिदंबरम ने कहा कि सभी देशों ने ट्रंप के फैसलों की निंदा की और इसे "टैरिफ का हथियार बनाना" करार दिया. उन्होंने कहा, "(यूएस सुप्रीम कोर्ट के) फैसले के बाद, राष्ट्रपति ट्रंप (कानून के दूसरे नियमों के तहत) जो करने की कोशिश कर रहे हैं, वह भी टैरिफ को हथियार बनाना है, और इसकी भी निंदा होनी चाहिए."
अमेरिका-भारत ट्रेड डील पर ट्रंप की हाल की बातों का जिक्र करते हुए (जिसमें उन्होंने कहा था कि "कुछ नहीं बदलेगा" और भारत टैरिफ देना जारी रखेगा और अमेरिका नहीं देगा) चिदंबरम ने संतुलित समझौता सुनिश्चित करने के केंद्र के दावों पर सवाल उठाया.
उन्होंने सवाल किया, "क्या यही वह लेन-देन है जिसका भरोसा तब दिया गया था जब भारत और अमेरिका ने 2 फरवरी, 2026 को संयुक्त बयान जारी किया था? क्या यही वह 'उपलब्धि' है जिसका जश्न भारत सरकार ने संयुक्त बयान के तुरंत बाद मनाया?"
बता दें, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के ग्लोबल टैरिफ को अवैध करार देने के फैसले से बौखलाए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को सभी देशों पर टैरिफ को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने की घोषणा की. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, ट्रंप ने शुक्रवार को भारत समेत सभी देशों पर 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की थी.