मोहाली : चंडीगढ़ विश्वविद्यालय (CU) में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला “स्मोक फ्री एग्रीकल्चर: टर्निंग रेजिड्यू इंटू रिसोर्सेस” का सफलतापूर्वक समापन हुआ। पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रम (EEP) के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में पराली प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों पर विशेषज्ञों ने मंथन किया। उद्देश्य : पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को रोकना और कृषि अवशेषों को कंपोस्ट, जैव-ऊर्जा व मृदा उर्वरक जैसे मूल्यवान संसाधनों में बदलने के प्रति जागरूकता फैलाना। प्रमुख अतिथि : कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पर्यावरण सेवक श्री प्रभु नाथ शाही (पूर्व फ्लाइट इंजीनियर, IAF) रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. मनजीत सिंह (डीन, PAU) ने शिरकत की।
सहभागी संस्थान : कार्यशाला में पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, GNA विश्वविद्यालय, CGC झंजेरी, रयात बाहरा और संत बाबा भाग सिंह विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं व विद्यार्थियों ने भाग लिया।
तकनीकी सत्र और नवाचार : विशेषज्ञ सत्रों में ग्रीन एनर्जी सॉल्यूशंस के एमडी श्री लखवीर सिंह, NIT कुरुक्षेत्र के डॉ. जितेंद्र सिंह यादव और गोदरेज एंड बॉयस के श्री नितिन चौहान ने कृषि अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन हेतु उन्नत मशीनरी और नवाचारों पर प्रकाश डाला।
शैक्षणिक भ्रमण : कार्यशाला के दूसरे दिन प्रतिभागियों को व्यावहारिक अनुभव के लिए पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) और पंजाब रिमोट सेंसिंग सेंटर का भ्रमण कराया गया, ताकि वे फसल अवशेष प्रबंधन की वास्तविक निगरानी प्रक्रिया को समझ सकें।