भारतीय खेल प्राधिकरण (एसएआई) और सफदरजंग स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर (एसआईसी) ने बुधवार को स्पोर्ट्स साइंस, स्पोर्ट्स मेडिसिन, एथलीट पुनर्वास, अनुसंधान, नवाचार, शिक्षा और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह साझेदारी भारतीय खिलाड़ियों को वैज्ञानिक और विश्वस्तरीय सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
दोनों संस्थानों की विशेषज्ञता का होगा समन्वय
युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के तहत एसएआई और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत एसआईसी के बीच हुए इस एमओयू का उद्देश्य दोनों संस्थानों की विशेषज्ञता, बुनियादी ढांचे और वैज्ञानिक क्षमताओं को एकीकृत कर एथलीटों और सपोर्ट स्टाफ को व्यापक सहयोग उपलब्ध कराना है।
स्पोर्ट्स साइंस और मेडिकल प्रैक्टिस को मिलेगा बढ़ावा
इस सहयोग के तहत प्रमाण-आधारित स्पोर्ट्स साइंस और स्पोर्ट्स मेडिसिन को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही मल्टी-डिसिप्लिनरी रिसर्च, चोट की रोकथाम, एथलीटों के पुनर्वास और वैज्ञानिक तरीकों से उनके प्रदर्शन में सुधार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुए हस्ताक्षर
एमओयू पर युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के सचिव (खेल) हरि रंजन राव और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की सचिव पुण्या सलिला श्रीवास्तव की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए। एसएआई की ओर से स्पोर्ट्स साइंस डिवीजन के कार्यकारी निदेशक ब्रिगेडियर (डॉ.) विभु कल्याण नायक तथा एसआईसी की ओर से निदेशक (डॉ.) दीपक जोशी ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।
स्पोर्ट्स साइंस और मेडिसिन का तालमेल है भविष्य : हरि रंजन राव
खेल सचिव हरि रंजन राव ने कहा कि उच्च प्रदर्शन वाले खेलों का भविष्य स्पोर्ट्स साइंस और स्पोर्ट्स मेडिसिन के बेहतर तालमेल पर निर्भर करता है। उनके अनुसार यह एमओयू शोध, वैज्ञानिक नवाचार, एथलीट निगरानी और पुनर्वास को संस्थागत स्तर पर मजबूत करेगा तथा भारतीय खिलाड़ियों के लिए विश्वस्तरीय व्यवस्था विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
एथलीटों को मिलेगा वैज्ञानिक सहयोग
स्वास्थ्य सचिव पुण्या सलिला श्रीवास्तव ने कहा कि स्पोर्ट्स मेडिसिन और स्पोर्ट्स साइंस अब खिलाड़ियों के स्वास्थ्य और प्रदर्शन का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। यह साझेदारी चोट की रोकथाम, क्लिनिकल देखभाल, पुनर्वास और वैज्ञानिक अनुसंधान को मजबूत करने के लिए दोनों मंत्रालयों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
शोध और नवाचार को मिलेगी नई दिशा
ब्रिगेडियर (डॉ.) विभु कल्याण नायक ने कहा कि इस सहयोग से बहु-विषयक शोध, मानकीकृत क्लिनिकल और स्पोर्ट्स साइंस प्रोटोकॉल, ज्ञान के आदान-प्रदान तथा एथलीटों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। वहीं प्रोफेसर (डॉ.) दीपक जोशी ने कहा कि यह साझेदारी शोध, शिक्षा, पुनर्वास और प्रमाण-आधारित स्पोर्ट्स मेडिसिन को और मजबूत करेगी।
खेलो इंडिया और टॉप्स को मिलेगा लाभ
यह एमओयू भारत सरकार के वैज्ञानिक, एथलीट-केंद्रित और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी खेल पारिस्थितिकी तंत्र के लक्ष्य के अनुरूप है। इससे खेलो इंडिया, टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स) और विकसित भारत@2047 के तहत भारत को अग्रणी खेल राष्ट्र बनाने की दिशा में भी मजबूती मिलेगी। साथ ही भविष्य के ओलंपिक और पैरालंपिक सहित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए खिलाड़ियों की तैयारी और उच्च प्रदर्शन प्रणाली को सशक्त बनाने में मदद मिलेगी