ग्लोबल इंडस्ट्री लीडर्स और भारतीय-अमेरिकी समुदाय की प्रमुख हस्तियों ने शुक्रवार को कहा कि अदाणी समूह का अमेरिका में प्रस्तावित मल्टी-बिलियन डॉलर का निवेश भारतीय कंपनियों को लेकर वैश्विक धारणा बदलने में मदद कर रहा है।
आईएएनएस से बातचीत में उन्होंने इसे भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों, रोजगार सृजन और रणनीतिक सहयोग के लिए बड़ा बढ़ावा बताया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान उनके चुनावी सलाहकारों में शामिल रहे रिपब्लिकन नेता पुनीत अहलूवालिया ने कहा कि अदाणी ग्रुप के प्रस्तावित निवेश अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भारतीय कंपनियों और पेशेवरों के बढ़ते योगदान को दर्शाते हैं।
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि यह बहुत सकारात्मक कदम है। राष्ट्रपति ट्रंप, जिन्होंने वैश्विक व्यवस्था को फिर से संतुलित करने में शानदार काम किया है, ऐसे प्रतिभाशाली और अनुभवी लोगों के साथ काम करना चाहते हैं।"
अहलूवालिया ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "भारतीय मूल के सफल सीईओ और मेहनती अमेरिकी नागरिक अमेरिका के लिए अवसर पैदा कर रहे हैं, लेकिन अदाणी ग्रुप जैसी कंपनी का अमेरिका में आना हमारे लिए और भी मददगार होगा।"
अदाणी ग्रुप के खिलाफ पहले हुई कार्रवाई के राजनीतिक रूप से प्रेरित होने के सवाल पर अहलूवालिया ने कहा कि अगर इसमें राजनीतिक कारण शामिल रहे हों तो उन्हें "हैरानी नहीं होगी।"
उन्होंने कहा, "मुझे खुशी है कि राष्ट्रपति ट्रंप का मजबूत नेतृत्व, जो दुनिया भर में और भारत-अमेरिका साझेदारी को मजबूत करने में दिख रहा है, सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।"
वहीं, बीजेपी यूएसए के अध्यक्ष अडापा प्रसाद ने कहा कि अमेरिकी अभियोजकों द्वारा मामला वापस लेना महत्वपूर्ण है, क्योंकि अधिकारियों ने माना कि उनके पास पर्याप्त सबूत नहीं थे।
प्रसाद ने कहा, "यह भारत की विकास गाथा को अस्थिर करने की मंशा से तैयार की गई दुर्भावनापूर्ण रिपोर्ट थी।" उन्होंने कहा कि अंततः मामले के बंद होने से यह साबित हुआ कि "सच्चाई की जीत हुई।"
फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज के संस्थापक निदेशक खंडेराव कंद ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच मजबूत आर्थिक सहयोग अब केवल निवेश तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसमें रिसर्च, लोगों की आवाजाही और नीतिगत सुधारों में भी गहरा सहयोग शामिल होना चाहिए।
कंद ने आईएएनएस से कहा, "यह एक अच्छा कदम है। इससे भारत-अमेरिका साझेदारी मजबूत होगी और इसे लगातार आगे बढ़ाया जाना चाहिए।"
उन्होंने कहा कि औद्योगीकरण, संयुक्त रिसर्च एवं डेवलपमेंट, कौशल-आधारित आवाजाही और बाजार तक पहुंच में करीबी सहयोग दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करेगा तथा लंबे समय में रणनीतिक फायदे देगा।